#राधे कृष्ण
पकरे हैं प्यारी पिया आली आज फाग में।
मचि रही होरी गोरी बृंदाबन बाग में॥
घेर लिये लाल मुख मसली गुलाल बाल।
गुलचे हैं गाल बस कीने अनुराग में॥
नांच लै नचाये अंग अंग छिरकाये साज।
बाजहू बजाये रंग छायो अति राग में॥
सरसबिहारी लिये निज उरधारी नारी।
यह सुख भारी लिख्यो सखियन के भाग में॥🌹
देखो देखो ब्रजकी बीथिनि बीथिनि खेलत हैं हरि होरी।
गीत विचित्र कोलाहल कौतुक संग सखा लख कोरी॥
आई झूमि झूमि झुंडन जुरि अगनित गोकुल गोरी।
तिनमें जुवती कदम्ब शिरोमणि राधा नवल किसोरी॥
छिरकत ग्वालबाल अबलन पर बूका वदन रोरी।
अरुन अकास देखि संध्या भ्रम पुनि मनसा भई बौरी॥
रपटत चरन कीच अरगजा की केसरी कुंकुम घोरी।
कही न जाय ‘गदाधर’ पै कछु बुधिबल मति भई थोरी॥🌹🌹
मेरी चुँदरी में पड़ गयो दाग री,
ऐसो चटक रंग डारो श्याम।
मोहू सी केतिक ब्रज सुन्दरि,
उनसों न खेलै फाग री॥
औरन को अचरा न छुए,
याकी मोही सो पड़ रही लाग री।
'बलिदास' वास ब्रज छोड़ो,
ऐसी होरी में लग जाये आग री॥🌹🌹🌹