Shamsher bhalu Khan
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हार जीत के दर्मियां नहीं फर्क ज्यादा है मान ले हार या करे जीत का इरादा है। वक्त है कभी मुश्किल कभी सादा है बदी से दूर खुद से खुद का वादा है। जुबां जमन कार हों यक्सा वाइज़ तेरे झूठ का बोझ तूने खुद पे क्यों लादा है। मेरे सब्र की इंतहा आंसुओं से न तौल हूं यार ए फकी याराना सीधा सादा है। रहो अकेले जंगल में बीच हैवानों के रहे इंसानों में वही जिसमें ये माद्दा है। जो है सो है जबीं पे नकाब नहीं दुरुस्त पहना चोगे पे कोट फटे पे लबादा है। जिगर सुन सुन के जा जो नहीं हुआ तू खुद मुहर्रिर नहीं नसीब का बादा है। #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #😇 चाणक्य नीति