INSTALL
Shyamnandan Kumar
475 views
•
14 days ago
ज़िंदगी परबत हवे बाकिर चढ़े के पड़ी, आपन लड़ाई अपने से ही लड़े के पड़ी। केहू नाही आइ तोहके देबे के सहारा, ठोकर खा के खुदे आगे बढ़े के पड़ी। खाली बसंत के फूल नाही हऽ ज़िंदगी, पतझड़ में पतई नियन झड़े के पड़ी। केतनो निमन होई केहू, आइ ना कामे, आपन दुखवा अपने से ही हरे के पाङी आईसे ना मिली मूङी पर तहारा छाह . श्यामनंदन ओकरा खातिर धूप मे जले के पाङी #✍मेरे पसंदीदा लेखक #✍प्रेमचंद की कहानियां #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #📚कविता-कहानी संग्रह #💔दर्द भरी कहानियां अइसे नाही मिली मुड़ी पर तहरा छाँह, श्यामनंदन ओकरा खातिर धूप में जरे के पड़ी। - हमारे नानाजी
10
18
Comment

More like this

nazma ..❤️
#✍मेरे पसंदीदा लेखक
125
122
KULDEEP.SINgH(AB)
#📗प्रेरक पुस्तकें📘
22
23
Prasanjit Mandal
##🌸 सत्य वचन #👌 अच्छी सोच👍 #🖊 एक रचना रोज़ ✍ #✍मेरे पसंदीदा लेखक #❤️जीवन की सीख
13
13
PALAK
#✍मेरे पसंदीदा लेखक
211
127
D....B...
#✍मेरे पसंदीदा लेखक
32
20
Jƙ_SαԋҽႦ
#✍️ साहित्य एवं शायरी
405
393
चौधरी
#✍मेरे पसंदीदा लेखक
510
423
nazma ..❤️
#✍मेरे पसंदीदा लेखक
18
16
Jƙ_SαԋҽႦ
#📚कविता-कहानी संग्रह
36
37
Jƙ_SαԋҽႦ
#✍️ साहित्य एवं शायरी
28
40