#😎मोटिवेशनल गुरु🤘
वैज्ञानिकों ने प्रयोग करने हेतु एक कमरेमे कुछ बंदरोंको रखा | छत को लटकाकर केले रखे |लेकिन पहुँचने का साधन कुछ नहीं था | बन्दर केले को ताकते रहते | कुछ दिनोबाद का कमरेमे एक सीढ़ी रखा दि | बन्दर धीरे धीरे सीढ़ी का उपयोग कर केले खाने के अभ्यस्त हो गए | कुछ दिनोंबाद जैसे ही बन्दर सीढी चढने लगे तो आधे अंतर पर पहुंचते ही जोरदार पानी की ब्योच्छावर हो ऐसी रचना कियी | पहले पहले तो बंदरोंको ध्यान में नहीं आया | लेकिन धीरे धीरे बात उनके ध्यान में आयी की सीढ़ी पर चढ़नेसे पानी की मार पड़ती है , इसलिए सीढी की और जाना छोड़ दिया |
कुछ दिनोबाद एक दो बन्दर नए छोड़े गए | नए बन्दर केले को देख कर सीढ़ी की और दौड़े| जैसे वह सीढ़ी चढने लगे तो पुराने बंदरोने उन्हें खिंचा और जाने से रोका | ऐसा बार बार होने के बाद नए बन्दर भी न जाने के अभ्यस्त हो गए | सात दिनोबाद 2 पुराने बंदरोंको निकालकर दो नए बन्दर रखे गए ,| घटना क्रम पूर्व जैसा रहा | पुराने बन्दर नये बंदरोंका सीढ़ी चढनेसे विरोध करते देखे | नए बंदरोंको धीरे धीरे आदत हो गयी | कुछ दिनों बाद पुराने बंदरोंकी सारी टोली बदल के नए बंदरोंकी टोली आयी जिसमे पानी का मार खाने वाला एक भी बन्दर नहीं था | लेकिन सीढ़ीपर जाने से विरोध करने की परंपरा बनी रही |
विवेक कुमार