sunder singh
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#santrampaljimaharaj #GodMorningMonday #जनसेवक_रत्न_संतरामपालजी . अविनाशी कबीर कबीर साहेब स्वयं परमात्मा है। अजर अमर अविनाशी है। चारो युग मे शरीर प्रगट करके लीला करते हैं। कलयुग मे कबीर साहिब काशी मे लहरतारा तलाब मे प्रगट होकर एक शिशु रुप मे लीला की। एक जुल्हा के घर पालन पोषण हुआ। स्वयं ही सभी लीलाएं करके उदाहरण पेश करते है। एक संत की, शिष्य की गुरु की, दास की एक विनम्र भगत की भूमिका स्वयं करी और सबके लिए एक उदाहरण पेश करके गये कि एक संत में कैसे गुण होना चाहिए, एक आधीन भगत को गुरु चरणों में किस तरह रहना चाहिए, अहंकार को कैसे खत्म करना चाहिए, दास भाव कैसे रखना चाहिए! वे स्वयं परमात्मा थे पर गुरु मर्यादा बनाए रखने के लिए औपचारिक गुरु बनाया। स्वयं परमात्मा थे लेकिन शिष्य की भूमिका करके उदाहरण दिया कि अपने ईष्ट का दास सेवक नौकर कुत्ता बनकर रहना है तभी अहंकार रूपी राक्षस को खत्म करके अमर लोक जाया जा सकता है। खुद के लिए तो उन्होंने कहा है - न मेरा जन्म न गर्भ बसेरा, बालक बन दिखलाया। काशी नगर जल कमल पर डेरा, वहाँ जुलाहे ने पाया।। माता - पिता मेरे कुछ नाहीं, ना मेरे घर दासी। जुलहा का सुत आन कहाया, जगत करें मेरी हाँसी।। पाँच तत्व का धड़ नहीं मेरा, जानुं ज्ञान अपारा। सत्य स्वरूपी नाम साहेब का, सोई नाम हमारा।। अधर द्वीप गगन गुफा में, तहां निज वस्तु सारा। ज्योत स्वरूपी अलख निरंजन धरता ध्यान हमारा।। हाड़ चाम लहु ना मेरे कोई जाने सत्यनाम उपासी। तारन तरन अभय पद दाता, मैं हूँ कबीर अविनाशी।। Sa News Channel YouTube