घना जंगल, ठंडी हवा और अँधेरा…
भारत–नेपाल बॉर्डर पर SSB की 27वीं बटालियन गश्त पर थी।
कमांड कर रहे थे सब-इंस्पेक्टर अर्जुन सिंह—शांत चेहरा, लेकिन आँखों में आग।
रात करीब 2:30 बजे वॉकी-टॉकी पर आवाज़ आई—
“सर, बॉर्डर पिलर 112 के पास संदिग्ध मूवमेंट।”
अर्जुन ने हाथ का इशारा किया।
पूरी टीम जमीन से चिपककर आगे बढ़ी।
नाइट विज़न में साफ दिख रहा था—
हथियारों की तस्करी करने वाला गिरोह, भारी बैग्स के साथ बॉर्डर पार करने वाला था।
अचानक क्लिक!
एक सूखी टहनी टूटी।
“कौन है?”
अगले ही पल गोलियों की आवाज़ गूँज उठी।
“कवर लो!” अर्जुन गरजे।
जंगल गोलियों से काँप उठा।
एक तस्कर भागने लगा—
हवलदार राकेश ने दौड़ लगाई, छलाँग मारी और उसे ज़मीन पर पटक दिया।
दूसरी तरफ़ दो लोग नदी में कूद गए।
अर्जुन ने बिना सोचे पानी में छलांग लगा दी।
तेज़ बहाव, अँधेरा, लेकिन पकड़ मजबूत।
एक तस्कर ने चाकू निकाला—
धप्प!
अर्जुन की राइफल का बट उसके हाथ पर पड़ा।
चाकू पानी में गिर गया।
10 मिनट का ऑपरेशन।
6 तस्कर गिरफ्तार।
हथियार बरामद।
बॉर्डर सुरक्षित।
सुबह की पहली रोशनी में जवान चुपचाप खड़े थे।
कोई जश्न नहीं, कोई शोर नहीं।
राकेश ने कहा,
“सर, लोग कहते हैं बॉर्डर पर शांति है।”
अर्जुन मुस्कुराए,
“क्योंकि SSB जाग रही है।”
जब देश चैन से सोता है,
तब SSB का जवान जंगल, नदी और अँधेरे से लड़ रहा होता है।
जय हिन्द जय भारत 🇮🇳 🇮🇳🌹
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