HARESH CHUDASAMA
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कभी राख सा रह जाता हूँ मैं कभी पानी सा बह जाता हूँ मैं. कुछ ख़लिश सी दबी है मेरे मन में उसी को अल्फाजों में कह जाता हूँ मैं कोई समझे तो ठीक वरना अल्फाजों तक ही रह जाता हूँ मैं यूं तो हूं पानी सा शीतल सरल मैं बस कभी पानी सा ही बह जाता हूँ मैं अपनी कल्पनाओं में झूमता रहता हूँ मैं हर पल कुछ ना कुछ ढूंढता रहता हूँ मैं जिंदगी की तपिश में तपता हुआ आखिर में बस राख सा रह जाता हूँ मै...!! #🤝 દોસ્તી શાયરી #💘 પ્રેમ 💘 #💓 લવ સ્ટેટ્સ #💖 રોમેન્ટિક સ્ટેટ્સ #👌 બેસ્ટ ફ્રેન્ડ