श्रद्धा मां
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जय शनिदेव यह रही शनिदेव जी और श्रद्धा पर आधारित एक भावपूर्ण धार्मिक कहानीः श्रद्धा की परीक्षा - शनिदेव की कृपा एक नगर में एक गरीब लोहार रहता था। उसके पास धन नहीं था, पर उसके मन में शनिदेव के प्रति अटूट श्रद्धा थी। हर शनिवार वह काले तिल, सरसों का तेल और एक दीपक लेकर पीपल के नीचे शनिदेव का ध्यान करता। लोग उसका मज़ाक उड़ाते थे-"गरीबी में भी पूजा? शनिदेव तो दंड देने वाले हैं!" लोहार मुस्कुरा कर कहता, "शनिदेव दंड नहीं देते, वे कर्म और श्रद्धा का न्याय करते हैं।" एक दिन नगर का राजा लोहार की सच्ची भक्ति को परखना चाहता था। उसने लोहार पर झूठा चोरी का आरोप लगवाया। लोहार को कारागार में डाल दिया गया। कारागार में भी लोहार ने शनिदेव का स्मरण नहीं छोड़ा। उसने कहा-"हे शनिदेव, यदि यह मेरे कर्मों का फल है, तो में इसे स्वीकार करता हूँ।" उसी रात राजा ने स्वप्न में देखा-शनिदेव काले वस्त्रों में प्रकट हुए और बोले, "जिसने अन्याय सहकर भी श्रद्धा नहीं छोड़ी, उसका अपमान करने वाला दंड से नहीं बचेगा।" राजा घबरा गया। सुबह होते ही उसने सच्चाई जानी और लोहार को मुक्त कर सम्मान दिया। शनिदेव की कृपा से लोहार का जीवन बदल गया, पर उसका अहंकार नहीं बढ़ा। नगर के लोग समझ गए- शनिदेव देर से नहीं, सही समय पर न्याय करते हैं। और सच्ची श्रद्धा कभी व्यर्थ नहीं जाती। जया शनिदेव जी आदरणीय श्रद्धा मां #जय शनिदेव जी