Vivek bharti
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परिचय जंगल से प्रवास करने वाले आदमी के पीछे अचानक शेर पड़ा | आदमी डर के मारे भागने लगा | और जैसा अंतर कम होने लगा तो जान बचाने हडबडी में बड़ी मेहनत के बाद एक वृक्ष पर चढाने में सफल हुवा | डाली पर बैठकर चैन की सास लेता तो ऊपर वाली डाली पर एक बड़ा बन्दर बैठा हुवा देखा जो इसे ताक रहा था | इसकी तो हालत ख़राब | निचे खुंखार शेर खड़ा और ऊपर आदमखोर बन्दर | अकाल हुशारी से काम ले आदमी बन्दर को कंहा ,” भाई , आप हमारे पूर्वज , मेरी रक्षा करना आपका कर्तव्य है |” बन्दर ने भी सुरक्षा की हामी देते हुए मचान बनाकर उसे आराम करने की व्यवस्था कर दियी | निचे शेर ताक में बैठा ही था | शाम ढली रात होने लगी | बन्दर से प्राप्त फल खाकर आदमी तृप्त हुवा | बन्दर ने कंहा ये शेर खतरनाक है हमारे जान को खतरा है , हमें बारी बारी जगना होगा | प्रथम आधे रात्री के समय बन्दर ने पहरा दिया | शेर ने उसे कंहा की इन्सान बड़ा खरनाक होता है , हम एक जंगल के है, भाई भाई है, उसे निचे गिरा दो, मै भोजन कर निकल जाऊंगा | आप ऐश में रहना | लकिन बन्दर ने उसकी एक ना मानी | रात्री के उत्तरार्ध में बन्दर सोया और आदमी जागने लगा | शेर ने फिर चाल चली कहने लगा “ अरे तुझे बाल बच्चे है , घर जाना है, मुझे आहार चाहिए , इस बन्दर को गिरा दे मै चला जाऊंगा |” पहले आदमी नहीं माना लेकीन थोड़ी देर बाद सोचने लगा ऐसा कब तक चलेगा ? यह शेर तो मुझे छोड़ेगा नहीं | इस बन्दर को निचे गिरा दे तो मै मुक्त हो जाऊंगा |इस लालच में आकर उसने बन्दर को धक्का दिया | अब यह बन्दर तो बन्दर ही था , झटसे ऊपर वाली डाली पकड़ा कर ऊपर जा बैठा | अब तो आदमी डर के मारे कांपने लगा और बन्दर की क्षमा मांगकर अपने व्यवहार के बारे में खेद प्रकट करने लगा | बन्दर ने कंहा , “ मै तो मेरे वचन के अनुसार तुम्हारी रक्षा करूँगा | पर एक बाद याद रखना इस पश्चात् कभी भी इस बात का जिकर नंही करना की आप बन्दर के वंशज हो |” विवेक कुमार #😎मोटिवेशनल गुरु🤘