काशी के ब्राह्मणों ने करौंत स्थापित कर यह भ्रम फैलाया कि इससे स्वर्ग मिल सकता है। यह एक पाखंड था, जो अज्ञानता के कारण लोगों ने सच मान लिया।
गरीबदास जी ने स्पष्ट कहा कि भक्ति के बिना मोक्ष संभव नहीं है। काशी में मरने या करौंत से गर्दन कटाने से मोक्ष नहीं मिलता। केवल सत्य साधना से ही जीव का उद्धार होता है।
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