“जहाँ गणेश जी का वास होता है,
वहाँ हर कार्य सरल और सफल होता है।”
भगवान गणेश अन्नदाता के रूप में विराजमान हैं। वे हरे-भरे खेतों के बीच बैठे हैं, जो खेती, समृद्धि और प्रकृति से जुड़ाव को दर्शाता है।
गणेश जी के शरीर और आसन में फल, अनाज, सब्ज़ियाँ और पत्तियाँ दिखाई दे रही हैं, जो यह संकेत देता है कि अन्न ही जीवन है और भगवान स्वयं अन्न का रूप हैं।
उनके चारों ओर गाँव के किसान, महिलाएँ और बच्चे हाथ जोड़कर प्रार्थना कर रहे हैं, जिससे ग्रामीण संस्कृति, आस्था और कृतज्ञता झलकती है।
गणेश जी के एक हाथ में आशीर्वाद मुद्रा, दूसरे में मोडक/अन्न, और अन्य हाथों में अस्त्र व पाश हैं — जो रक्षा, संतुलन और शुभता का प्रतीक हैं।
नीचे उनका वाहन मूषक भी दिख रहा है, जो विनम्रता और जागरूकता का प्रतीक है।
पूरा वातावरण शांत, पवित्र और सुनहरी रोशनी से भरा हुआ है, जैसे सुबह का समय हो — जो नई शुरुआत का संकेत देता है।
#जय श्री गणेश