#शिव पार्वती #🔱महाशिवरात्रि Coming Soon 🪔 #🙏शिव पार्वती
शीर्षक: 🕉️🔥 जब प्रेम की अग्नि में सती हुई 'सती': शिव और शक्ति के अमर प्रेम की गाथा 🔥🕉️
यह कथा है उस प्रेम की, जिसने सृष्टि को हिला दिया, जिसने त्याग की पराकाष्ठा को छुआ।
दक्ष प्रजापति ने कठोर तप से माँ आद्या शक्ति को पुत्री 'सती' के रूप में प्राप्त किया। ब्रह्मा जी के परामर्श पर सती का विवाह आदि पुरुष भगवान शिव से हुआ।
किंतु, एक सभा में शिव द्वारा खड़े होकर सम्मान न दिए जाने पर अहंकारी दक्ष ने इसे अपना अपमान समझा और शिव से बैर पाल लिया।
दक्ष का महायज्ञ और सती का हठ:
एक बार दक्ष ने कनखल में एक भव्य यज्ञ का आयोजन किया। आकाश मार्ग से जाते देवताओं को देख सती ने शिव से वहां जाने का हठ किया। शिव ने बहुत समझाया कि "बिना बुलाए पिता के घर भी नहीं जाना चाहिए", पर सती नहीं मानीं।
शिव ने उन्हें वीरभद्र के साथ भेज दिया।
अपमान की अग्नि:
दक्ष के घर पहुँचकर सती को घोर अपमान का सामना करना पड़ा। दक्ष ने शिव के लिए कटु शब्द कहे: "तुम्हारा पति श्मशानवासी और भूतों का नायक है।"
सती ने यज्ञमंडप में देखा कि सभी देवताओं का भाग है, पर उनके स्वामी शिव का नहीं।
सती का आत्मदाह:
पति का यह अपमान सती से सहन नहीं हुआ। उन्होंने क्रोधित होकर कहा: "जो नारी अपने पति के लिए अपमानजनक शब्द सुनती है, उसे नरक मिलता है। मैं अब एक क्षण भी जीवित नहीं रहना चाहती।"
और सती ने योगाग्नि से स्वयं को भस्म कर लिया। 🔥
शिव का तांडव और शक्तिपीठों का निर्माण:
समाचार मिलते ही शिव प्रलयंकार रूप में वहां पहुंचे। वीरभद्र ने दक्ष का वध किया। सती के जले हुए शरीर को देखकर शिव अपनी सुध-बुध खो बैठे। वे सती के शव को कंधे पर उठाकर उन्मत्त होकर तीनों लोकों में घूमने लगे। सृष्टि थम गई।
अंततः, भगवान विष्णु ने अपने चक्र से सती के अंगों को काटा। जहाँ-जहाँ सती के अंग गिरे, वहां 51 शक्तिपीठ स्थापित हुए।
धन्य है शिव और सती का यह अलौकिक प्रेम, जिसने उन्हें अमर और वंदनीय बना दिया।
हर हर महादेव! 🙏🌹