हिन्दू व मुसलमान में जो भाईचारे, धार्मिक सामंजस्य का बीज परमेश्वर कबीर जी बो गए थे, उसकी मिसाल मगहर में आज भी देखी जा सकती है। जहां से परमेश्वर कबीर जी सशरीर सतलोक गए थे उस स्थान पर हिन्दू व मुसलमानों ने मंदिर व मजार 100-100 फुट की दूरी में यादगार बना रखी है।
कबीर, विहंसे कहयो तब तीनसै, मजार करो संभारा।
हिन्दू तुरक नहीं हो, ऐसा वचन हमारा।।
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