एक तरह की चींटी होती है जो दूसरी कॉलोनी के पास जाती है, वहाँ की एक काम करने वाली चींटी को मार देती है और उसकी गंध अपने ऊपर लगा लेती है।
चींटियों के लिए गंध ही सब कुछ होती है। उसी गंध की वजह से वो आराम से दूसरी कॉलोनी में घुस जाती है, कोई उसे रोकता भी नहीं। बाकी चींटियाँ उसे अपनी ही समझकर नजरअंदाज कर देती हैं।
फिर वो धीरे-धीरे अंदर बढ़ती है, रानी तक पहुँचती है और उस पर एक अलग तरह की गंध डाल देती है। इससे बाकी चींटियाँ रानी के ही खिलाफ हो जाती हैं और उसे घेरकर मार देती हैं।
मजेदार बात ये है कि घुसपैठ करने वाली चींटी को खुद लड़ने की जरूरत ही नहीं पड़ती—पूरी कॉलोनी उसका काम कर देती है।
रानी के मरने के बाद वही घुसपैठिया आगे बढ़कर अपनी नस्ल बढ़ाता है। अब वो बाहरी नहीं रहता, वही भविष्य बन जाता है।
ठीक ऐसा ही “विचारों का कब्ज़ा” (ideological takeover) में भी होता है।
कोई बाहरी और खतरनाक विचारधारा आती है, लेकिन सीधे-सीधे नहीं। वो पहले अपने आपको हमारे जैसे दिखाती है। हमारे ही शब्द इस्तेमाल करती है—जैसे न्याय, बराबरी, करुणा, अधिकार, प्रगति।
धीरे-धीरे वो इन शब्दों के मतलब बदल देती है, और हमें पता भी नहीं चलता।
फिर वो अंदर तक घुस जाती है।
लोगों की सोच बदलने लगती है—जिम्मेदारी को क्रूरता जैसा दिखाया जाता है, कानून को ज़ुल्म जैसा, सीमाओं को नफरत जैसा, परंपरा को खतरा और इतिहास को शर्म की चीज़ बना दिया जाता है।
और फिर क्या होता है? समाज खुद ही अपने खिलाफ खड़ा हो जाता है।
कोर्ट, यूनिवर्सिटी, धार्मिक संस्थाएँ, मीडिया, सरकारी सिस्टम—सब अपनी ही जड़ों को गलत मानने लगते हैं। उन्हें लगता है कि वो सही कर रहे हैं, सिस्टम को बचा रहे हैं।
असल में वो उसी चीज़ को बढ़ावा दे रहे होते हैं जो उन्हें “सही” लगने लगी है। उन्हें पता ही नहीं चलता कि असली घुसपैठिया कौन है, क्योंकि वो उनकी ही भाषा में बात करता है।
और जब आखिर में असली मूल सिद्धांत ही हटा दिए जाते हैं—उन्हें बदनाम करके, तोड़-मरोड़ कर—तब उस बाहरी विचारधारा को कुछ जीतने की जरूरत नहीं रहती। वो बस बाकी बची चीज़ों पर कब्ज़ा कर लेती है।
रानी खत्म हो चुकी होती है। कॉलोनी पहले जैसी नहीं रहती।
सबसे खतरनाक जीत वही होती है, जिसमें समाज को ये यकीन दिला दिया जाए कि उसकी अपनी जड़ें ही उसकी दुश्मन हैं—और उन्हें खत्म करना ही सही काम है।
गौर से देखें... समझें... कहीं आपके साथ भी तो यही न हो रहा....!
*🙏श्री राधे राधे🌹🥰🙏* #🖊 एक रचना रोज़ ✍