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#सनातन संस्कार (वसुधैव-कुटुंबकम) सौ साल की आजादी पर हमारा भारतवर्ष कुछ ऐसा होना चाहिए * विकसित देशों की तरह एक सख्त संविधान जो सबके लिए समान हो ! * एक समान शिक्षा व्यवस्था और एक समान अध्ययन सामग्री ! * अनावश्यक एवं अनुपयोगी अध्ययन सामग्रियां शेष न हों ! * विद्यार्थी की आर्थिक एवं मानसिक स्थिति के अनुकूल विषयों का चयन किया जाए ! अथवा कुशल बनाया जाए ! * सभी को सब धर्मों की शिक्षा अनिवार्य हो ! सिर्फ सार्वजनिक शिक्षा केंद्रों मे ही अध्ययन एवं अध्यापन की अनुमति हो ! और सभी प्रकार के नीजि धार्मिक शिक्षा केंद्रों का संचालन पूर्ण रूप से प्रतिबंधित हो ! * उच्चशिक्षा एवं सरकारी नौकरियों को पूर्णतः आरक्षण मुक्त ! * ठेकेदारी एवं अस्पतालों मे शोषण को बलात्कार से ज्यादा जघन्य अपराध का दर्जा हो ! * चुनाव लड़ने की योग्यता लिखित परीक्षा परिणामों के आधार पर तय हो ! * माता-पिता को संतान की कम से कम एक चौथाई चल-अचल संपत्ति के उपयोग स्वतंत्र अधिकार हो ! * सिर्फ मादक पदार्थों एवं लक्जरी चीजों पर टैक्स लागू हो ! * यात्रा वाहन व कानूनी एवं चिकित्सकीय सहायता के लिए न्यूनतम समय सीमा तय हो ! * महिलाओं के द्वारा पुरूषों के उत्पीड़न को महिलाओं के उत्पीड़न के समान दर्जा हो ! * आधुनिकीकरण की रेस अल्प शिक्षितों, निर्धनों, अनाथों एवं बुजुर्गों के अनदेखी का कारण न हो ! * इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के इस्तेमाल के लिए साक्षरता एवं उपयोग के अनुकूल नियमावली हो ! * विद्यार्थियों की आवश्यक्तानुसार गैजेट्स का प्रावधान हो ! जिनमें उनका मनोरंजन युक्त शिक्षण सामग्री के अतिरिक्त कुछ भी अनावश्यक करना असंभव हो ! * गैर प्राकृतिक अथवा प्राकृतिक आपदाएं संयुक्त रूप से बीमा एवं भुगतान के योग्य हों ! * बेरोजगार भारतीयों को आवास,आहार एवं शत-प्रतिशत चिकित्सकीय सुविधाओं का अधिकार हो ! * सभी निजी एवं सरकारी संस्थाओं एवं नियुक्तियों को समान रूप से पारदर्शी एवं संबंध आधारित आरक्षणों से मुक्त हों * भ्रष्टाचार का अपराध देशद्रोह एवं बलात्कार के समान दंडनीय हो * सभी गांवों के लिए लघु उद्योग एवं उत्तम कृषि उपकरणों की उपलब्धता एवं सतर्क निगरानी सुनिश्चित हो !