babu dasi
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*🌈बन्दीछोड़ सतगुरु रामपाल जी महाराज जी की जय🌈* 28/01/2026 *🌱कबीर परमेश्वर निर्वाण दिवस सेवा🌱* *♦️इंस्टाग्राम सेवा♦️* 🎋  *मालिक की दया से निर्वाण दिवस से सम्बंधित इंस्टाग्राम पर सेवा करेंगे।* *टैग⤵️* #508वां_GodKabir_निर्वाणदिवस #GodKabirNirvanDiwas #कबीर_परमेश्वर_निर्वाण_दिवस #moksha #salvation #ganges #maghar #kashi #banaras #varanasi #nirvana #jaishreeram #hanumanchalisa #sanatandharma #satlok #SantRampalJiMaharaj 📷 *सेवा से सम्बंधित फ़ोटो लिंक⤵️* *Hindi* https://www.satsaheb.org/hindi-nirvan-diwas/ #santrampal ji maharaj *English* https://www.satsaheb.org/english-nirvan-diwas/ *Punjabi* https://www.satsaheb.org/punjabi-nirvan-diwas/ *Marathi* https://www.satsaheb.org/marathi-nirvan-diwas/ *Kannad* https://www.satsaheb.org/kannad-nirvan-diwas-3/ *Telugu* https://www.satsaheb.org/telugu-nirvan-diwas-2/ *Assamese* https://www.satsaheb.org/assamese-nirvan-diwas-2/ *Odia* https://www.satsaheb.org/odia-nirvan-diwas/ *⛳सेवा Points* ⤵ ♦️महीना माघ शुक्ल पक्ष तिथि एकादशी वि. स. 1575, सन् 1518 को परमेश्वर कबीर साहेब जी मगहर से सशरीर अपने अविनाशी धाम सतलोक गए थे जिसका प्रमाण आज भी मगहर (वर्तमान जिला कबीर नगर) में विद्यमान है। यही प्रमाण ऋग्वेद मंडल 9 सूक्त 93 मंत्र 2 देता है कि परमात्मा सशरीर प्रकट होता है और सशरीर अपने निज लोक को चला जाता है। गरीब, काया काशी मन मगहर, दौहूं के मध्य कबीर। काशी तज मगहर गया, पाया नहीं शरीर।। ♦️बंदीछोड कबीर परमेश्वर जी सन् 1398 में काशी शहर में प्रकट होकर 120 वर्ष लीला करने के बाद सन् 1518 में मगहर (वर्तमान कबीर नगर जिला, उत्तरप्रदेश) से सशरीर सतलोक गए थे। ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 93 मंत्र 2, मण्डल 10 सूक्त 4 मंत्र 3 में यह प्रमाण हैं कि परमात्मा सशरीर आता है और सशरीर अपने अविनाशी धाम लौट जाता है। ♦️वेदों में प्रमाण है कि पूर्ण परमात्मा सशरीर पृथ्वी पर प्रकट होता है और सशरीर ही वापस अपने लोक सतलोक में चला जाता है। प्रमाण ऋग्वेद मंडल 9 सूक्त 94 मंत्र 2 कलयुग में इसका साक्षात प्रमाण मगहर में है, जहां बंदीछोड कबीर परमेश्वर जी के सतलोक प्रस्थान के बाद उनके शरीर के स्थान पर सुगंधित पुष्प मिले थे। और कबीर परमात्मा लहरतारा तालाब पर सशरीर प्रकट हुए थे। ♦️पांच तत्व का धड़ नहीं मेरा, जानुं ज्ञान अपारा। सत्य स्वरूपी नाम साहेब का, सोई नाम हमारा।। हाड़, चाम, लहु नहीं मेरे, कोई जाने सत्य नाम उपासी। तारन तरन अभय पद दाता, मैं हूं कबीर अविनाशी।। कबीर परमेश्वर जी ने स्वयं कहा था कि मेरा पांच तत्व से बना शरीर नहीं है। मैं अविनाशी परमात्मा हूँ। न मेरा जन्म होता, न मृत्यु। सबका उद्धार करने आया हूँ। ♦️ मगहर से सतलोक गया कबीरा, जाका पाया नहीं शरीरा। आदरणीय धर्मदास जी ने परमेश्वर कबीर साहेब जी की महिमा में कहा है :- हिन्दू के तुम देव कहाये, मुसलमान के पीर। दोनो दीन का झगड़ा छिड़ गया, टोहे न पाया शरीर।। कबीर परमेश्वर जी अजरो अमर हैं और सशरीर अपने सतलोक गए थे। हिंदू और मुसलमानों ने जब उनके शरीर का अंतिम संस्कार करना चाहा। तब उनका शरीर नहीं मिला था। शरीर के स्थान पर सुगन्धित फूल मिले थे। ♦️परमेश्वर कबीर साहेब जी ने एक ऐसी लीला की जो इतिहास बन गई और इस तरह की लीला परमात्मा स्वयं ही करते हैं। कबीर साहेब जी 120 वर्ष की आयु में मगहर में शरीर त्यागने की बात कह कर हजारों लोगों समेत मगहर गए और सफेद चादर ओढ़कर लेट गए। तभी आकाशवाणी होती है - "उठा लो पर्दा,नहीं है मुर्दा।" चादर उठाने पर, शरीर के स्थान पर सुगंधित फूल मिले। उनका शरीर नहीं मिला था। ♦️चदरि फूल बिछाये सतगुरू, देखै सकल जिहाना हो। च्यारि दाग से रहत जुलहदी, अबिगत अलख अमाना हो।। (- सतग्रन्थ साहेब में राग मारू से शब्द) संत गरीबदास जी ने अपनी वाणी में प्रमाण दिया है कि बंदीछोड कबीर परमेश्वर जी चार दाग में नहीं आते। अजरो अमर हैं। न मां के गर्भ से जन्म लेते। ♦️संत गरीबदास जी महाराज की वाणी (पारख के अंग से वाणी):- तहां वहां चादर फूल बिछाये, सिज्या छाड़ी पदहि समाये। दो चादर दहूँ दीन उठाई, ताके मध्य कबीर न पाई।।1131।। तहां वहां अबिगत फूल सुवासी, मगहर घोर और चैरा काशी। अबिगत रूप अलख निरवाणी, तहां वहां नीर क्षीर दिया छांनी।।1132।। वर्तमान समय में मगहर में कबीर परमेश्वर जी की याद में मुस्लिम लोगों ने मज़ार और हिंदुओं ने समाधि बनाई हुई है जिसमें मात्र सौ फीट की दूरी का अंतर है। जहां बैठकर कबीर साहेब सत्संग किया करते थे वहां काशी-चौरा नाम से यादगार बनाई गई है। कबीर परमात्मा सशरीर सतलोक गए थे। ❌ *Plz Do Not Copy, Paste* ❌