#भारतेंदु हरिश्चंद्र जी को नमन🙏
“उन्नति पूरी है तबहिं जब घर उन्नति होय ।
निज शरीर उन्नति किये, रहत मूढ़ सब कोय।।” – भारतेंदु हरिश्चंद्र (9 सितंबर 1850 – 6 जनवरी 1885)
अपनी लेखनी से अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध जनचेतना का संचार करने तथा हिन्दी की अपार सेवा कर संस्कृति, समाज और साहित्य को नई दिशा व आयाम प्रदान करने वाले, समाजोत्थान को समर्पित हिंदी नाटकों के महान नाटककार, आधुनिक हिंदी साहित्य के पितामह “भारतेन्दु हरिश्चन्द्र जी” की 141वीं पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।
आधुनिक हिंदी साहित्य को और अधिक समृद्ध करने में आपके अतुलनीय योगदान को सदैव स्मरण किया जायेगा।
#भारतेंदु हरिश्चंद्र की पुण्यतिथि पर नमन#🙏भारतेंदु हरिश्चंद्र जी पुण्यतिथि💐#🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान#📓 हिंदी साहित्य