डॉ. भीमराव अंबेडकर की मूर्ति का अनावरण (Unveiling) उनके समानता, न्याय और बंधुत्व के सिद्धांतों को नमन करने का एक ऐतिहासिक क्षण है। यह आयोजन आधुनिक लोकतंत्र के निर्माता, संविधान शिल्पी और समाज सुधारक को सच्ची श्रद्धांजलि है, जो उनके विचारों को आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा के रूप में स्थापित करता है।
डॉ. बी.आर. अंबेडकर मूर्ति अनावरण के लिए हिंदी में प्रमुख पंक्तियाँ:
समता और न्याय का प्रतीक: "यह प्रतिमा केवल पत्थर या धातु की नहीं, बल्कि समानता, न्याय और मानवाधिकारों की अटूट भावना का प्रतीक है"।
संविधान निर्माता को नमन: "भारतीय संविधान के शिल्पकार, बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की यह प्रतिमा राष्ट्र को उनके योगदान की याद दिलाती है"।
सामाजिक समरसता: "अंबेडकर जी की यह प्रतिमा समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय और समता सुनिश्चित करने की हमारी प्रतिबद्धता को याद दिलाती है"।
ज्ञान और शिक्षा की मिसाल: "यह प्रतिमा हमें याद दिलाती है कि शिक्षा ही वह सशक्त माध्यम है, जिससे हम समाज में समानता ला सकते हैं"।
राष्ट्र सर्वोपरि: "जाति, धर्म से ऊपर उठकर, राष्ट्र की एकता और संविधान की भावना को सर्वोपरि मानने वाले महामानव को नमन"।
अनावरण समारोह के लिए आदर्श नारे/विचार:
"शिक्षा, संगठित रहो, संघर्ष करो" - बाबा साहेब के मूल मंत्र के साथ अनावरण।
"भारतीय संविधान के शिल्पकार को शत-शत नमन"।
"समानता के प्रतीक, बाबा साहेब को वंदन"।
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