MLP
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*🌹सुख-दुख सपने🌹* 🙏🙏🙏 तुम्हारी वास्तविकता उस सांस से बड़ी नहीं है, जो तुम्हारे अंदर और बाहर आती-जाती रहती है। यह तुम्हारी गति है और यही तुम्हारे लिए सबसे अधिक मूल्यवान है। तुम्हें इसे स्वीकार करना है, समझना है। केवल यही चीज है जो तुम्हें जीवित रखती है। इस भव्य आशीर्वाद के चले जाने से तुम्हारे लिए हर चीज बेकार हो जाएगी, एकदम बेकार। एक धोबी अपने गधे से बहुत प्रेम करता था क्योंकि उसी से उसकी रोजी-रोटी चलती थी। प्रेम से उसने उसका नाम ‘किशन’ रख दिया। एक दिन वह एक स्कूल के पास से गुजर रहा था। स्कूल के अंदर से आवाज सुनाई दी। मास्टर जी अपने विद्यार्थी को मारते हुए कह रहे थे, ‘तू गधा है, मार-मार कर तुझे मनुष्य बना दूंगा।’ जब धोबी ने सुना कि मास्टरजी गधे से मनुष्य बना देते हैं, तो उसने सोचा, मेरा कोई पुत्र भी नहीं है। अगर किशन मनुष्य बन गया तो कितना अच्छा होगा। वह मास्टर जी के पास गया और कहने लगा, ‘मास्टरजी, एक गधा और है, इसको भी मनुष्य बना दो।’ मास्टर जी मजाकिया किस्म के थे। उन्होंने कहा, ‘ठीक है छोड़ जा यहां, पेड़ के पास बांध दे।’ धोबी ने गधे को पेड़ के पास बांध दिया। मास्टर जी ने कहा, ‘तीन दिन बाद आना।’ तीन दिन बाद मास्टरजी ने गधे को पेड़ से खोल कर पीछे बांध दिया और गधे की जगह उस विद्यार्थी को खड़ा कर दिया। मास्टरजी भी वहीं थे। उसने कहा, ‘मास्टर जी, मेरा गधा मनुष्य बन गया?’ मास्टर जी ने कहा, 'बिल्कुल बन गया।’ धोबी ने देखा, किशन बढ़िया धोती, बंडी और टोपी पहने हुए अकड़ कर खड़ा है। उसको अच्छा लगा कि मेरा किशन मनुष्य बन गया। धोबी ने हरी-हरी घास जमीन से खींची और पास गया और कहा ‘ले किशन, ले घास ले, तू भूखा होगा।’ विद्यार्थी ने कहा, ‘चल भाग यहां से। क्या कह रहा है?' धोबी बोला, ‘किशन, तू मुझे क्यों नहीं पहचान रहा है? मैं ही तेरा धोबी हूं। मैं ही तेरा बाप हूं।’ जब धोबी ने तीन-चार यह बात कही तो विद्यार्थी ने उसको लात मार दी। धोबी ने कहा, ‘ठीक है। तेरी लात मारने की आदत अभी नहीं गई है। तू वही का वही है।’ हर मनुष्य की यही कहानी है। अपनी धारणाओं, कल्पनाओं में बह कर वह पता नहीं क्या-क्या विश्वास करने लगता है। अपने उस सपने में, वह अपने आपको भी भूल जाता है कि मैं कौन हूं, मैं यहां क्या कर रहा हूं, क्यों मुझे यह मनुष्य शरीर मिला? वह जो देख रहा है उसे एक तमाशे की तरह सब कुछ दिख रहा है। अमीरी की तरफ देखता है, गरीबी की तरफ देखता है। जब मनुष्य पूछता है, गरीब क्यों है? अमीर क्यों है? तो मनुष्य ही समझाता है कि यह पिछले जन्म के कर्मों का फल है। ये सब समाज के बनाए हुए दायरे हैं और इन्हीं दायरों में फंस कर मनुष्य दुखी होता है। इस दुख का आरोप वह भगवान पर लगाता है। देखा है, लोग पहाड़ों पर जा रहे हैं। भगवान के पास जा रहे हैं। क्या यह सच है? पहाड़ी के ऊपर स्थित मंदिर में भगवान से मिलना चाहते है, तो शौक से जाये। पर अपने अंदर स्थित भगवान को मत भूले। तुम्हारा असली भगवान तुम्हारे अंदर है। कल्पनाओं के दायरे से बाहर निकले और हकीकत को पहचाने, समझे और उसका अनुभव करे! मंगलमय प्रभात प्रणाम #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #👍 सफलता के मंत्र ✔️ #👍 डर के आगे जीत👌 #👌 आत्मविश्वास #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख