श्री कृष्ण स्वयं कहते हैं कि बिना तुलसी के वे करोड़ों व्यंजनों को भी स्वीकार नहीं करते, क्योंकि तुलसी में उनकी आह्लादिनी शक्ति श्री राधा का वास है।
मान्यता है कि तुलसी के हर पत्ते पर सूक्ष्म रूप से 'राधा' नाम अंकित होता है, और यही कारण है कि कृष्ण उसे देखते ही तृप्त हो जाते हैं।
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