#GodMorningSaturday
दया समान धर्म नहीं
कबीर, क्षमा समान न तप,
सुख नहीं संतोष समान।
तृष्णा समान नहीं ब्याधी कोई,
धर्म न दया समान।।
भावार्थ:-परमेश्वर कबीर जी ने कहा है कि क्षमा करना बहुत बड़ा तप है। इसके समान तप नहीं है। संतोष के तुल्य कोई सुख नहीं है।
#santrampaljimaharaj