chalo English sikhe
483 views
#GodMorningSaturday दया समान धर्म नहीं कबीर, क्षमा समान न तप, सुख नहीं संतोष समान। तृष्णा समान नहीं ब्याधी कोई, धर्म न दया समान।। भावार्थ:-परमेश्वर कबीर जी ने कहा है कि क्षमा करना बहुत बड़ा तप है। इसके समान तप नहीं है। संतोष के तुल्य कोई सुख नहीं है। #santrampaljimaharaj