*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞*
*⛅दिनांक - 22 फरवरी 2026*
*⛅दिन - रविवार*
*⛅विक्रम संवत् - 2082*
*⛅अयन - उत्तरायण*
*⛅ऋतु - वसंत*
*⛅मास - फाल्गुन*
*⛅पक्ष - शुक्ल*
*⛅तिथि - पंचमी सुबह 11:09 तक तत्पश्चात् षष्ठी*
*⛅नक्षत्र - अश्विनी शाम 05:54 तक तत्पश्चात् भरणी*
*⛅योग - शुक्ल दोपहर 01:09 तक तत्पश्चात् ब्रह्म*
*⛅राहुकाल - शाम 04:59 से शाम 06:25 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅सूर्योदय - 06:54*
*⛅सूर्यास्त - 06:27 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅दिशा शूल - पश्चिम दिशा में*
*⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 05:15 से प्रातः 06:05 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:17 से दोपहर 01:04 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 12:15 फरवरी 23 से रात्रि 01:05 फरवरी 23 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)*
*🌥️व्रत पर्व विवरण - सर्वार्थसिद्धि योग (प्रातः 06:54 से शाम 05:54 तक), स्कन्द षष्ठी*
*🌥️विशेष - पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है एवं षष्ठी को नीम की पत्ती, फल या दातुन मुंह मे डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*
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*🔹किसी की मृत्यु के वक्त🔹*
#✡️ज्योतिष समाधान 🌟 #🌟देखिए खास ज्योतिष उपाय #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स
*🔸कहीं भी मृत्यु हो गई तो उसका तुम भला करना । तुलसी की सुखी लकड़ियाँ अपने घर में रख लो । कही भी अपने अड़ोस-पड़ोस में किसी की मृत्यु हुई तो उसके होठों पर, आँखों पर, शरीर पर, छाती पर तुलसी की सुखी लकड़ीयाँ थोड़ी रख लो और तुलसी की लकड़ी से उसका अग्निदान शुरू करो ।*
*🔸उसका कितना भी पाप होगा, दुर्गति से रक्षा होगी, नरकों से रक्षा होगी अथवा तुलसी की लकड़ीयाँ न हो तो तुलसी की माला शव के गले में डाल दो तो भी उसको राहत मिलेगी कर्मबंधन से ।*
*🔸तुलसी के पत्ते उसके मुहँ में डाल दो । तुलसी का पानी जरा छिटक दो । हरी ॐ ॐ ॐ.. का कीर्तन कराओ । फिर हास्य न कराओ । हरी ॐ ॐ... शांति ॐ... तुम अमर आत्मा हो । तुम चैतन्य हो । तुम शरीर नहीं हो । शरीर बदलता है । आत्मा ज्यों का त्यों । ॐ ॐ... कुटुम्बियों को मंगलमय जीवन मृत्यु पुस्तक पढ़ायें और कुटुंबी उसके लिए बोले क्योंकि मृतक व्यक्ति सवा दो घंटे के बाद मूर्छा से जगता है, जैसे आप मुर्दे को देखते हो, ऐसे ही वो अपने मुर्दे शरीर को देखता है । तो सूचना दो । तुम शरीर नहीं हो... तुम अमर आत्मा हो । मरने वाले तुम नहीं हो ।*
*शरीर का नाम है आप अनाम है । शरीर साकार है, आप निराकार है । शरीर जड़ था आप चेतन हो ॐ ॐ... आपने मृतक व्यक्ति की बड़ी भारी सेवा कर दी । उसके विचारों में आत्मज्ञान भरने का महापुण्य किया है । जो आत्मज्ञान देता है, वो तो ईश्वर रूप हो जाता है । आपका आत्मा तो ईश्वर रूप है ही है । कोई भी मर जाए, चाहे दुश्मन मर जाए, वैर मत रखो । उसकी सदगति हो, उसका भला हो ।*