#✍️ विचार #✍️सुविचार #☺️उच्च विचार #☺️प्रेरक विचार #☺चांगले विचार
✿•┅━꧁🌹सुप्रभात 🌹꧂━┅•✿
✿ मंगळवार दि. २४ फेब्रुवारी २०२६✿
✿ फाल्गुन शु. अष्टमी १९४७ ✿
✿ विक्रम सवत्सर २०८२✿
✿शिवशक ३५२✿
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*ஜ۩۞۩ संस्कृत सुभाषितमाला ۩۞۩ஜ*
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एकः सम्पन्नमश्नाति वस्ते वासश्च शोभनम्।
योऽसंविभज्य भृत्येभ्यः को नृशंसतरस्ततः।।
जो व्यक्ति स्वार्थी है, कीमती वत्र, स्वादिष्ट व्यंजन, सुख-ऐश्वर्य की वस्तुओं का उपभोग स्वयं करता है; उन्हें जरूरतमंदों में नहीं बाँटता-उससे बढ़कर क्रूर व्यक्ति कौन होगा?
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