#❤️जीवन की सीख #☝आज का ज्ञान
🙏॥ श्री हरिः॥🙏
🛐इंद्रियां-मन-बुद्धि-भगवान के हैं🛐
🍀एक मार्मिक बात है कि हमारे केवल भगवान ही हो सकते हैं। जड़ चीजें हमारी कैसे हो सकती हैं ? हम भगवान के अंश हैं, शरीर प्रकृति का अंश है । उस शरीर की सहायता से हमें भगवान की प्राप्ति कैसे होगी ? नहीं हो सकती । यह मूल बात है । ये शरीर- इंद्रियां- मन- बुद्धि भगवान के हैं, यह तो ठीक है, पर ये हमारी सहायता करेंगे, यह ठीक नहीं है । इनको अपना मानना बहुत बड़ी गलती है, मामूली गलती नहीं है। यह गलती भी नहीं सुधरेगी तो भगवान की प्राप्ति कैसे होगी ?
नाम जप में संख्या देखना उचित नहीं है । जिन भगवान ने हमें अनगिनत चीजें दी है, उनका नाम हम गिन कर ले । गिनती इसलिए रखो कि हमारा नाम जप कम न हो जाय। भगवान गिनती से नहीं मिलते, प्रेम से मिलते हैं।भगवान प्यारे लगने चाहिये। भगवान के साथ संबंध होने से ही गंगाजी आदि श्रेष्ठ है। कहीं भी विशेषता दिखे तो हमारी वृत्ति भगवान की तरफ जानी चाहिये, न कि जड़ की तरफ । 🍀
‼️इसीलिए शरीर से संसार की सेवा करो। नौकरी, व्यवसाय आदि, खूब पुरूषार्थ करो, परंतु मन केवल भगवान् मे लगा दो। फिर जीवन मे आनंद ही आनंद होगा।‼️