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सतलोक आश्रम बैतूल में हुआ दहेज रहित विवाह | SA News Chhattisgarh
बैतूल | 17-02-2026: संत रामपाल जी महाराज जी के 39वें बोध दिवस के उपलक्ष्य में सतलोक आश्रम, बैतूल में 15 से 17 फरवरी तक आयोजित महासमागम न केवल भक्ति का केंद्र बना, बल्कि समाज सुधार की एक प्रयोगशाला भी सिद्ध हुआ। इस भव्य आयोजन के दौरान 16 फरवरी को एक ऐसा दृश्य उपस्थित हुआ जिसने आधुनिक विवाह पद्धति पर गंभीर प्रश्न और एक सुंदर समाधान प्रदर्शित हुआ।
आज विवाह संस्कार को डीजे (DJ), हल्दी, मेहंदी और खर्चीली रस्मों का पर्याय बना दिया गया है, जिसने पवित्र बंधन को व्यापार और प्रदर्शन की वस्तु बना दिया है। यदि हम अपने पवित्र सद्ग्रंथों और पुराणों का गहन अध्ययन करें, तो कहीं भी इन आधुनिक और शोर-शराबे वाली रस्मों का उल्लेख नहीं मिलता। हमारे धर्मग्रंथ साक्षी हैं कि त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश के विवाह भी अत्यंत सादगी और मर्यादा में संपन्न हुए थे। उनमें न तो दहेज का लेन-देन था और न ही कोई बाह्य आडंबर।
उसी आदि-सनातन परंपरा को पुनर्जीवित करते हुए, संत रामपाल जी महाराज अपने शिष्यों (बच्चों) को वही नेक संस्कार दे रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में, 21 जोड़ों का विवाह बिना किसी दान-दहेज, बिना बैंड-बाजे और बिना किसी फिजूलखर्ची के संपन्न हुआ। जिसे "रमैनी" कहा जाता है। मात्र 17 मिनट में गुरु वाणी के पाठ के साथ संपन्न हुए ये विवाह इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं कि परमात्मा की भक्ति और गृहस्थ जीवन का निर्वाह सादगी से ही उत्तम है।
संत जी के अनुयायी "दहेज मुक्त भारत" के सपने को साकार कर रहे हैं। यह विवाह समारोह समाज के लिए एक दर्पण है कि यदि हम पुराणों और संतों के बताए मार्ग पर चलें, तो विवाह बोझ नहीं, बल्कि एक पवित्र संस्कार बन है।
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