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नजर चुरा के नजर मिलाना तेरा,
उफ़्फ़ नजर फेरकर मुस्कुराना तेरा!
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हाँ तुम्हारे शहर में पगली,
अब हुआ सर्द-ए-मर्ज बहुत है!
चलूँ कम्बल ओढ़कर,
बस चुपके से सो जाना अच्छा है!
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खुश्क चाहतों की गर्मियाँ,
जब छूने लगें होठों को!
तब जनाब समझ लीजिए,
दिल का मामला हुआ संगीन है!
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जोर से न मारिये अब,
हर धक्का यूँ जनाब!
दिल-नजर के चोट पे...
ये दिल बेहिसाब होता है!
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तुम्हारा ये लब्ज-ए-इलजाम,
दिल न संभले जान भी ले ले!
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गजब सरारत तुम्हरी और,
सहम दिल हमारे गए!
बगरी चाहतों के दौर में,
बेवजह ही हम मारे गए!
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तुम गुजर जाओ धड़कनों से,
कुछ इस कदर कि....
पलक झुककर नजर से,
इश्क में बढ़कर बेकरार कहे!
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बेचैन रातें बिताकर मैं,
किश्तें चुकाता रहा....!
बस कुछ यूँ मुस्कुराकर
उसने कर्ज़दार कर दिया....!!
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और भी बहाने लाख हैं पर,
ये मन के भी खास हैं!
जान रूठो या मुस्कुराओ,
दिल पर बस तुम्हरे ही राज हैं!!
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कुछ यूँ खामोशी से,
चित्रों में करार कर!
चलो फिर मुहब्बत से,
हम भी इबादत लिखते हैं!
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दिल पे ही ठहर जाते हैं
लोल लड्डू बूँदी के,
कमबख्त नजर को भी,
अब समझाना हुआ मुश्किल है! 💕💞
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.....✍️रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒
🌳🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳🌳
#🌹प्यार के नगमे💖 #❤️ आई लव यू #💝 शायराना इश्क़ #💔पुराना प्यार 💔 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️