एक दलित नेता ने अपनी राजनीति चमकने के लिए घर के सामने बोर्ड लगवा कर “द ग्रेट चमा****** र” लिखा — तालियाँ बजीं।
एक सीआरपीएफ की महिला सिपाही ने थप्पड़ कंगना रनौत को सरेआम थप्पड़ मारा, तो पूरा सोशल मीडिया उसे “किसान की बेटी” बता कर — देवी बना दिया गया।
आज अगर ये लड़की कहती—
जाट, गुज्जर, अहीर, किसान, अशोक या शिवाजी की वंशज हूँ,
तो आज इस पर फूलों की बारिश हो रही होती।
अगर कहती—
“बाबा साहब की बेटी हूँ”,
तो संविधान की रक्षक बना दी जाती।
तो आज इस पर फूलों की बारिश हो रही होती।
लेकिन इसने सिर्फ इतना कहा—
“ठाकुर हूँ।”
बस यहीं से ये सामंतवादी घोषित कर दी गई।
इसे ही कहते हैं चयनात्मक आक्रोश।
बाक़ी सब…
पाखंड।
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