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#@@@ श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय 18, श्लोक 62 में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को संपूर्ण भाव से उस परमेश्वर की शरण में जाने का उपदेश देते हैं, जिसकी कृपा से अर्जुन परम शांति और शाश्वत धाम (सत्यलोक) को प्राप्त कर सकेगा, जहाँ जाने के बाद जीव संसार में लौटकर नहीं आता, जिसका अर्थ है पूर्ण शांति और मोक्ष की प्राप्ति एवं श्रीमद्भागवत गीता का 8 अध्याय श्लोक 9 में कविर्देव, अर्थात् कबीर परमेश्वर जो कवि रूप से प्रसिद्ध होता है वह अनादि, सबके नियन्ता सूक्ष्मसे भी अति सूक्ष्म, सबके धारण-पोषण करनेवाले अचिन्त्य-स्वरूप सूर्यके सदृश नित्य प्रकाशमान है। जो उस अज्ञानरूप अंधकारसे अति परे सच्चिदानन्दघन परमेश्वरका सुमरण करता है। (9)