Vivek bharti
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ग्लास का भार एक बार एक साइकोलॉजी की प्रोफेसर वर्ग में आई। और एक ग्लास उठा लिया।। सबने सोचा की अब वो वहीँ पुराना ‘ग्लास आधा ख़ाली है या आधा भरा’ वाला पाठ पढ़ाएगी। पर उसके बदले उन्होंने छात्रों से पूछा की उनके हाथ में जो ग्लास है उसका वजन कितना है? सभी छात्रों ने अपने अपने अनुसार उत्तर दिए।। किसी ने 50ग्राम कहा, तो किसी ने 100 ग्राम।। पर महिला प्रोफेसर ने जवाब दिया: ” मेरे ख्याल से इसग्लास का exact weight matter नहीं करता।। बल्कि ये matter करता है की मैं इसे कितनी देर तक hold करके रखती हूँ। अगर मैं इसे केवल 1-2 मिनिट के लिए उठा के रखती हूँ तो ये मुझे सामान्य सा लगेगा।। पर यदि मैं इसे एक घंटा उठा के रखती हूँ तो मेरा हाथ दुखने लगेगा।। पर यदि मैं इसे पूरा दिन उठा के रखूं।। तो यक़ीनन मेरा हाथ सुन्न पड़ जायेगा।। थोड़ी देर के लिए paralyse हो जायेगा।। मतलब की इसका थोडा सा भार भी, यदि मैं ज्यादा देर तक उठा की रखूं। तो मुझे तकलीफ हो सकती है।।” सभी इस उत्तर से सहमत थे। वो आगे बोली, ” इसी तरह अगर, एक छोटी सी समस्या की चिंता मैं करती रहूँ।। तो पहले वो कोई ख़ास भार नहीं देगी मन पर।। पर यदि मैं उसी के बारे में सोचती रहूँ।। उसी से परेशान रहूँ।। उसी पर stress करती रहूँ।। तो वो छोटी से परेशानी भी मुझे बहुत कष्ट दे सकती है।। मैं डिप्रेशन का शिकार हो सकती हूँ।। मैं दूसरा कुछ भी कार्य करने में असमर्थ हो जाउंगी।। यही तो हमारी वास्तविक परेशानी है #😎मोटिवेशनल गुरु🤘