मैं कोई शायर नहीं बस उस औरत की आवाज़ हूं जो टूटी भी है झुकी भी है मगर कभी रुकी नहीं मैंने अपने आंसुओं को स्याही बनाया है और हर दर्द को शब्दों में पिरोया है ताकि जब कोई इन्हें पढ़े तो सिर्फ़ मेरी बातें नहीं मेरा जज़्बा भी महसूस करे मैं वो नहीं जो भीड़ में गुम हो जाए मैं वो हूं जो चुप रहकर भी एक किताब जैसी लगती है लोग कहते हैं कि मेरे अल्फ़ाज़ बहुत गहरे होते हैं उन्हें कौन समझाए कि गहराई तो तब आती है जब कोई भीतर तक डूब चुका हो मैं मोहब्बत इसलिए लिखती हूं क्योंकि मैंने मोहब्बत में खुद को खोया है मैं वफ़ा इसलिए लिखती हूं क्योंकि मैंने बेवफाई को करीब से देखा है मैं सच इसलिए लिखती हूं क्योंकि झूठ ने मुझे बहुत तकलीफ़ दी है जो लोग मुझे पसंद करते हैं उनसे बस इतनी गुजारिश है कि मेरे लफ़्ज़ों से पहले मेरी खामोशी को समझना सीखो क्योंकि वहीं असली मैं छुपी हुई हूं अगर कभी मेरी लिखी किसी बात में तुम्हारा दर्द दिख जाए तो जान लेना मैं तुम्हारे जैसे ही टूटे दिल की एक लड़की हूं मुझे ना शोहरत चाहिए ना तालियां बस कोई एक हो जो दिल से कह दे कि तू बहुत सच्चा लिखती है और शायद बहुत सच्ची भी है
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