Nkkalyani
593 views
भारत की सभ्यता केवल इतिहास की किताबों में दर्ज कोई कहानी नहीं है, बल्कि यह आज भी जीवित है, सांस ले रही है और अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए संघर्ष कर रही है। सनातन धर्म कोई संकीर्ण विचार नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक शाश्वत पद्धति है, जिसने इस राष्ट्र को हजारों वर्षों तक जोड़े रखा है। आज जब इस सभ्यता पर वैचारिक, सांस्कृतिक और कानूनी स्तर पर लगातार हमले हो रहे हैं, तब कुछ लोग ऐसे हैं जो बिना भय, बिना समझौते के आगे खड़े हैं। तस्वीर में दिखाई दे रहे ये तीनों व्यक्ति उसी संघर्ष की जीवंत पहचान हैं। ये लोग केवल मंचों पर भाषण देने वाले चेहरे नहीं हैं। इन्होंने अदालतों से लेकर सड़कों तक, मीडिया से लेकर सामाजिक विमर्श तक, हर जगह सनातन पक्ष को मजबूती से रखा है। जब बहुसंख्यक समाज को चुप रहने की सलाह दी जा रही थी, तब इन्होंने सवाल पूछने का साहस दिखाया। जब आस्था को अंधविश्वास कहकर अपमानित किया जा रहा था, तब इन्होंने तर्क, संविधान और इतिहास के साथ उसका प्रतिवाद किया। यही कारण है कि आज करोड़ों हिंदू इन्हें अपनी आवाज मानते हैं। लेकिन इतिहास गवाह है कि जो भी सच के पक्ष में खड़ा होता है, उसे सबसे पहले निशाना बनाया जाता है। आज के समय में सत्य बोलना केवल वैचारिक जोखिम नहीं, बल्कि कई बार शारीरिक खतरे को भी आमंत्रण देना होता है। सनातन धर्म की बात करना, मंदिरों की रक्षा की आवाज उठाना, हिंदुओं के संवैधानिक अधिकारों की चर्चा करना—इन सबको एक वर्ग विशेष द्वारा “असहिष्णुता” का नाम दे दिया जाता है। और इसी मानसिकता से प्रेरित होकर ऐसे लोगों पर हमले की आशंका लगातार बनी रहती है। इसी संदर्भ में इन तीनों सनातन योद्धाओं की सुरक्षा का प्रश्न अत्यंत गंभीर हो जाता है। यह केवल तीन व्यक्तियों की बात नहीं है, बल्कि उस विचारधारा की सुरक्षा का सवाल है, जो भारत की आत्मा से जुड़ी हुई है। अगर ऐसे लोगों की आवाज को डराकर, धमकाकर या नुकसान पहुंचाकर दबाया जा सकता है, तो यह पूरे समाज के लिए खतरे की घंटी है। इसलिए इन व्यक्तियों को Y+ श्रेणी की सुरक्षा देना कोई विशेषाधिकार नहीं, बल्कि एक आवश्यक कदम है। यह समझना जरूरी है कि सुरक्षा देना किसी को बढ़ावा देना नहीं होता, बल्कि संभावित खतरे को स्वीकार करना और उससे निपटने की तैयारी करना होता है। आज जब कट्टर विचारधाराएं खुलकर हिंसा का रास्ता अपनाने से नहीं हिचकतीं, तब उन लोगों की सुरक्षा करना राज्य और समाज दोनों की जिम्मेदारी बन जाती है, जो राष्ट्र और धर्म के लिए मुखर होकर खड़े हैं। अगर समाज ऐसे लोगों को अकेला छोड़ देता है, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए कोई भी सच बोलने का साहस नहीं करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने यह दिखाया है कि राष्ट्र अपनी सांस्कृतिक पहचान को लेकर अब रक्षात्मक नहीं, बल्कि आत्मविश्वासी है। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ जैसे नेतृत्व ने यह साबित किया है कि कानून-व्यवस्था और धर्म का सम्मान साथ-साथ चल सकते हैं। ऐसे वातावरण में यह अपेक्षा और भी मजबूत हो जाती है कि जो लोग संवैधानिक दायरे में रहकर सनातन मूल्यों की रक्षा कर रहे हैं, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। यह भी ध्यान देने योग्य है कि ये लोग किसी समुदाय के खिलाफ नफरत नहीं फैलाते, बल्कि अपने अधिकारों की बात करते हैं। ये समान कानून, समान सम्मान और समान न्याय की मांग करते हैं। इनका संघर्ष किसी को दबाने के लिए नहीं, बल्कि अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए है। फिर भी इन्हें धमकियां मिलती हैं, इन्हें डराने की कोशिश की जाती है, इनके परिवारों तक को निशाना बनाया जाता है। क्या ऐसे में समाज का मौन रहना उचित है? सनातन परंपरा हमेशा से कहती आई है कि जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है। लेकिन यह रक्षा केवल आध्यात्मिक नहीं, व्यावहारिक भी होनी चाहिए। अगर समाज केवल सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित रह जाए और वास्तविक मुद्दों पर चुप रहे, तो वह समर्थन खोखला हो जाता है। इन योद्धाओं की सुरक्षा की मांग उसी व्यावहारिक समर्थन का एक रूप है। आज जरूरत है कि हम यह स्पष्ट करें कि सनातन की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। अगर कोई व्यक्ति या समूह संविधान के भीतर रहकर अपनी संस्कृति, अपने मंदिरों और अपने समाज की बात करता है, तो उसकी रक्षा करना राष्ट्र का कर्तव्य है। Y+ सुरक्षा की मांग न तो अतिशयोक्ति है और न ही राजनीतिक हथकंडा, बल्कि एक यथार्थवादी आवश्यकता है। यह समय भावनाओं में बहने का नहीं, बल्कि जिम्मेदारी निभाने का है। एक शेयर, एक आवाज, एक समर्थन—ये छोटी चीजें लग सकती हैं, लेकिन इन्हीं से बड़ा संदेश जाता है। जब समाज एकजुट होकर कहता है कि हम अपने रक्षकों के साथ खड़े हैं, तब सत्ता के गलियारों तक वह आवाज पहुंचती है। अगर आज हम चुप रहे, तो कल जब कोई और सत्य के लिए खड़ा होगा, तो वह भी अकेला पड़ जाएगा। इसलिए यह केवल तीन लोगों की सुरक्षा का सवाल नहीं है, यह सनातन समाज के आत्मसम्मान का प्रश्न है। जो लोग धर्म और राष्ट्र के लिए निर्भीक होकर खड़े हैं, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य राजनीतिक टिप्पणी और सार्वजनिक घटनाओं पर आधारित है। #SanatanDharma #HinduUnity #ProtectionForHeroes #JaiShreeRam #VoiceOfSanatan #YPlusSecurity #साहू समाज साहू परिवार #अब्बड़ सुग्घर हमर छत्तीसगढ़ ❤️🔱🪔 #🕉️सनातन धर्म🚩 #🌷शुभ सोमवार #👌 छत्तीसगढ़िया सबसे बढ़िया