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दोस्त बनकर भी नहीं साथ निभाने वाला
वही अंदाज़ है ज़ालिम का ज़माने वाला
क्या कहें कितने मरासिम थे हमारे उससे
वो जो एक शख़्स है मूँह फेर के जाने वाला
तेरे होते हुए आ जाती थी सारी दुनियाँ
आज़ तन्हा हूँ तो कोई नहीं आने वाला
मुंतज़िर किसका हूँ टूटी हुई दहलीज़ पे मैं
कौन आयेगा यहाँ कौन है आने वाला
मैंने देखा है बहारों में चमन को जलते
है कोई ख़्वाब की ताबीर बताने वाला
⛵ सुप्रभात ⛵ #🌞 Good Morning🌞