md Rahmat sheikh
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1 days ago
फरवरी 2022… ये वही वक्त था जब देश के माहौल में नफ़रत का ज़हर बहुत तेज़ी से फैलाया जा रहा था। कहीं मुसलमान को “नाम पूछ-पूछकर” सड़क पर रोका जा रहा था, कहीं बेगुनाहों को पीटा जा रहा था, और कहीं सिर्फ पहचान के शक में इंसान की इज्ज़त, जान और इमान सबको निशाना बनाया जा रहा था। इस दौर में “मदद” और “इंसानियत” जैसे लफ्ज़ भी लोगों को पुराने लगने लगे थे। लेकिन उसी फरवरी 2022 में भोपाल के बरखेड़ी इलाके से एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने पूरी सोच हिला दी। मोहम्मद महबूब, जो पेशे से कारपेंटर हैं और साधारण जिंदगी जीते हैं उन्होंने वो काम कर दिखाया जो बड़े-बड़े दावे करने वाले भी नहीं कर पाते। जब एक हिन्दू लड़की स्नेहा गौर रेलवे ट्रैक के पास फँस गई और मालगाड़ी चल पड़ी, तो वहां मौजूद बहुत से लोग सिर्फ तमाशा देखते रहे। लेकिन महबूब तमाशा नहीं बने… वो मदद बने। वो दौड़कर आए, और जान की परवाह किए बिना चलती ट्रेन के नीचे लेट गए, लड़की को अपने हाथों से दबाकर बचाए रखा… और ऊपर से मालगाड़ी के कई डिब्बे गुजर गए। जरा सोचिए… एक सेकंड की गलती और महबूब की अपनी जिंदगी खत्म हो सकती थी। उनकी 3 साल की बेटी, घरवाले, बूढ़े।मां-बाप… सब पीछे रह जाते।।लेकिन महबूब ने कोई मजहब नहीं देखा उन्होंने सिर्फ एक जान को बचाना देखा। यही तो सच्चाई है…।जहां कुछ लोग “नाम” पूछकर मारते हैं, वहीं मुस्लिम समाज के लोग अक्सर मदद के नाम पर अपनी जान तक दांव पर लगा देते हैं। #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #❤ गुड मॉर्निंग शायरी👍 #☝ मेरे विचार #💞दिल की धड़कन #💓 मोहब्बत दिल से