Ghanshyam rajput
497 views
कबीर साहेब वि.स. 1575 सन् 1518 माघ महीने की शुक्ल पक्ष तिथि एकादशी को धार्मिक सामंजस्य और भाईचारे की जो विरासत छोड़कर गए हैं, उसे मगहर में आज भी जीवंत रूप में देखा जा सकता है। मगहर में जहाँ से कबीर जी सहशरीर सतलोक गए थे, वहां आज भी यादगार मौजूद है। कबीर, विहंसी कहयो तब तीनसै, मजार करो संभार। हिन्दू तुरक नहीं हौ, ऐसा वचन हमार।। #santrampal mahraj ji #🚀SC बूस्ट के साथ Views को सुपरचार्ज करें #😎 हार्दिक पांड्या #🙏गुरु महिमा😇 #🙏कर्म क्या है❓