न कोई जिस्म का बंधन, न कोई स्पर्श की प्यास,
ये तो दो आत्माओं का, युगों-युगों का विश्वास।
जहाँ प्रेम ही पूजा बने, और नाम ही बन जाए जाप,
मिट जाते हैं उस देहरी पर, दुनिया के सारे संताप।
राधा की मौन पुकार में, कान्हा की वंशी बजती है,
हर ढलती शाम ब्रज में, फिर से वही रास सजती है।
छूने की हसरत से परे, ये रूहानी एक अहसास है,
बिना मिले भी कान्हा, हर पल राधा के ही पास है।
जय श्री राधे कृष्ण🙏🙏
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