तुलसी पावस के समय, धरी कोकिलन मौन
अब तो दादुर बोलिहं, हमें पूछिह कौंन
वर्षा ऋतु आने पर कोयल मौन धारण कर लेती हैवह सोचती है कि अब तो मेंढक टर्राएंगे, तो हमारी सुरीली आवाज को कौन पूछेगा ? अर्थात जहाँ गुणहीनों का बोलबाला हो, वहाँ बुद्धिमान व्यक्ति का चुप रहना ही उचित है
जय सियाराम
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