Mukesh Sharma
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बेटियाँ तो सिर्फ एक एहसाह है। क्या लिखूँ?.... कि वो परियों का रूप होती हैं.... या कडकती ठंड में सुहानी धूप होती है.... वो होती है उदासी की हर मर्ज की तरह.... या ओस में शीतल हवा की तरह.... वो चिडियों की चहचहाहट है.... या कि निश्छल खिलखिलाहट है... वो आंगन में फैला उजाला है.... या मेरे गुस्से पर लगा ताला है..... वो पहाड की चोटी पे सूरज की किरण है.... या जिंदगी सही जीने का आचरण है.... है वो ताकत जो छोटे से घर को महल बना दे.... है वो काफिया जो किसी गजल को मुकम्मल बना दे..... क्या लिखूँ?.... वो अक्सर जो ना हो तो वरन माला अधूरी है.... वो जो सबसे ज्यादा जरूरी है... ये नहीं कहुँगा कि वो हर वक्त साथ साथ होती है बेटियाँ तो सिर्फ एक एहसाह होती है, उसकी आँखें ना मुझसे गुडिया माँगती है ना खिलोना, कब आओगे, बस एक छोटा सा सवाल सुनो ना... आपनी मजबूरी को छुपाते हुए देता हूँ जबाव तरीख बताओ, टाइम बताओ....अपनी उंगलियों पर करने लगती है वो हिसाब और जब मैं नहीं दे पाता सही जबाब अपने आँसुओं को छुपाने के लिये चेहरे पे रख लेती है किताब वो मुझसे आस्ट्रेलिया में छुट्टियाँ, मर्सिडिस टू ड्राइव, फाइव स्टार में डिनर या महंगे आईपॉड्स नहीं माँगती... ना वो ढेर से पैसे पिग्गी बैंक में उढेलना चाहती है.... वो बस कुछ देर मेरे साथ खेलना चाहती है... और मैं कहता हूँ यही...कि बेटा बहुत काम है....नहीं करुँगा तो कैसे चलेगा.... मजबूरी भरे दुनियाँ दारी के जबाव देने लगाता हूँ... और वो झूठा ही सही, मुझे अहसास दिलाती है.... कि जैसे सब समझ गई हो.. लेकिन आँखें बन्द करके रोती है..... जैसे सपनों में खेलते हुए मेरे साथ सोती है... जिंदगी ना जाने क्यूँ इतनी उलझ जाती है... और हम समझते है, बेटियां सब समझ जाती है.....apka apna #👫 हमारी ज़िन्दगी #☝अनमोल ज्ञान #🙏सुविचार📿 #📒 मेरी डायरी #☝ मेरे विचार