बिनोद कुमार शर्मा
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*माता अन्नपूर्णा की उत्पत्ति की पौराणिक कथा* *पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान शिव ने माता पार्वती से कहा कि यह संसार केवल माया है, भोजन भी माया है। शरीर और अन्न का कोई विशेष महत्व नहीं है। इस बात से माता पार्वती आहत हो गईं और उन्होंने निर्णय लिया कि वे संसार से अन्न को गायब कर देंगी। जैसे ही माता ने यह संकल्प किया, पूरे ब्रह्मांड में अन्न संकट उत्पन्न हो गया।* *जीवन सूखने लगा, लोग भूख से व्याकुल हो गए। तब माता पार्वती ने काशी (वाराणसी) में एक रूप धारण किया। वो माता अन्नपूर्णा के रूप में हाथों में अक्षय पात्र (भोजन का कभी न समाप्त होने वाला पात्र) लेकर खड़ी थीं। तभी शिवजी स्वयं भूख से व्याकुल होकर माता अन्नपूर्णा के पास भोजन मांगने पहुंचे। उन्होंने स्वीकार किया कि शरीर और अन्न का भी अस्तित्व में बड़ा महत्व है। इस प्रकार, अन्नपूर्णा देवी ने सभी को अन्न का दान दिया और तब से उनकी पूजा भोजन की देवी के रूप में होने लगी।* *माता अन्नपूर्णा से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें* *काशी में विश्वनाथ मंदिर के पास ही अन्नपूर्णा देवी का मंदिर स्थित है। मान्यता है कि यहाँ शिवजी स्वयं भिक्षुक रूप में माता से भोजन मांगते हैं। मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा को माँ अन्नपूर्णा की जयंती मनाई जाती है। इस दिन दान-पुण्य करने का विशेष महत्व है। जहां अन्न का सम्मान होता है, वहां कभी दरिद्रता नहीं आती। उनका स्मरण करने से भोजन की पवित्रता और संतुलन बना रहता है। एक कथा क अनुसार, एक बार जब पृथ्वी पर अन्न की कमी हो गयी थी, तब माँ पार्वती ने माँ अन्नपूर्णा के रूप में अवतार लिया और पृथ्वी लोक पर अन्न उपलब्ध कराकर समस्त मानव जाति की रक्षा की थी। जिस दिन माँ अन्नपूर्णा की उत्पत्ति हुई, वह मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा थी। देवी अन्नपूर्णा का एक हाथ हमेशा दान मुद्रा में होता है। यह बताता है कि दान ही सबसे बड़ा धर्म है। उनके अक्षय पात्र का अर्थ है कि जिस घर में श्रद्धा और सेवा है, वहां अन्न कभी समाप्त नहीं होता। अन्न केवल शरीर का पोषण नहीं करता, वह आत्मा के लिए भी माध्यम है सेवा का। अन्नपूर्णा देवी यह सिखाती हैं कि भोजन केवल खाने की चीज़ नहीं, ईश्वर का प्रसाद है।* *माँ अन्नपूर्णा से जुड़ा मंत्र* *अन्नपूर्णे सदापूर्णे शङ्कर प्राणवल्लभे।* *ज्ञान वैराग्य सिद्ध्यर्थं भिक्षां देहि च पार्वति॥* *इस मंत्र का जाप करने से जीवन में अन्न, ज्ञान, वैराग्य और संतुलन बना रहता है।* *-रामकृपा-* #किस्से-कहानी