#🪷सोम प्रदोष व्रत📿 #ॐ नमः शिवाय
अस्त्येव वस्तुजाते
नास्त्यस्मिन् संशयोsणुमात्रोsपि ।
यो यत्र स्मरति हरिं
स तत्र पश्यत्यवश्यमुम् ॥
[ नृसिंहचम्पु- २/१९ ]
अर्थात् 👉🏻 मेरा वह प्रभु समस्त वस्तुओं में है ही , इसमें अणुमात्र भी संशय नहीं है । जो जहाँ भी मेरे प्रभु का स्मरण करता है , वह वहीं उनका दर्शन कर लेता है ।
🌄🌄 प्रभातवन्दन 🌄🌄