"गुलिस्ताँ
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वो ढाई लफ़्ज़ों की
अदावत में जो अजीज हों,
हाथों में मुहब्बत की
अनोखी कमान दे देते हैं!
बस कहो कुछ कभी भी
एकबार फिरकर,
अपने दिल-ए-हाल का
कहकर हिसाब दे देते हैं!
जो दिल का मामला है
समझ से भी परे है,
सवाल सारे गलत हो
तो भी जवाब दे देते हैं!
कहीं उलझे हुए पन्नों को
बड़े ही सलीके से,
कोई अपने सुलझे हुए
हसीन से नाम दे देते हैं!
हर किसी की चाहत
नीले गगन में यूँ उड़ने को,
समय खिले रंग में ही
अपनी पहचान दे देते हैं!
जहाँ में मन के गुलिस्तां
का ही हर असर है,
डूबते हुए दिल को भी
बढ़कर करार दे देते हैं!
कुछ नही फिर भी
महसूस होने को पलपल,
अपने दामन में से
चढ़ते हुए खुमार दे देते हैं!
जो कभी भी बिके ही
नही बाजार में कहीं,
ख़ुद से महँगी ही
अपनी कुछ समान दे देते हैं!
कोई समझे कोई समझते ही
रह जाए यूँ ही,
कोई अपनी जिंदगी की
पूरी किताब दे देते हैं!
परिंदा पूछे रहने को
कभी घर का पता जो....
वो चाहत में सँवर अपना
दिल-ए-मकान दे देते हैं!💕💞
....✍️रवि प्रताप सिंह("पंकज")🍒
🌳🌳🌳🌳मनमोहन🌳🌳🌳🌳
#💝 शायराना इश्क़ #❤️ आई लव यू #💔पुराना प्यार 💔 #🌹प्यार के नगमे💖 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️