कल की कच्ची डोर... 🧵🌅
कल जो साथ थे, आज वो यादों के मेहमान हो गए। ये कविता उन लम्हों के नाम जिन्हें हम कल के भरोसे छोड़ देते हैं, ये सोचे बिना कि कल की महफ़िल में हम होंगे या नहीं। 🥀
अपने अपनों को आज ही गले लगा लें। ❤️
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