Inder Saini5
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16 hours ago
#🙏 ਸ਼੍ਰੀ ਗੁਰੂ ਅਰਜਨ ਦੇਵ ਜੀ . *┈┉┅━❀।।ੴ।।❀━┅┉┈* 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 *सतिनामु श्री वाहिगुरू* *_꧁♡गुरू घर की साखियां♡꧂_* *धंन श्री गुरू नानक देव जी* 🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸 *धंन श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी* ---------------------------------- *🌸साखी – बाबा बुढ़ा जी की🌸* बाबा बुढ़ा जी बड़े प्रसिद्ध और कमाई वाले सिक्ख हुए हैं। इन्होंने सिक्खी का उपदेश गुरू नानक देव जी से लिया और छह पातशाहियों के दर्शन किये। बाबा बुड्ढा जी का जन्म सम्वंत् 1563 विक्रमी, 7 कार्तिक को भाई सुघा जी रंधावा के घर माता गौरां जी की कोख से गांव कत्थूनंगल जिला अमृतसर में हुआ था। माता-पिता ने इनका नाम भूरा रखा था। 12 साल की उम्र में उनकी मुलाकात गुरु नानक देव जी से मवेशी चराने के दौरान हुई थी। गुरु साहिब ने भूरा के विचार सुनकर कहा यद्यपि आप युवा हैं लेकिन ज्ञान के मामले में आप एक युवा नहीं बल्कि एक बूढ़े व्यक्ति हैं। उसी दिन से उनका नाम बुड्ढा हो गया। भूरा जी (बुढा जी) भैंसें चराया करते थे। इन्होंने गुरू जी के दर्शन किये। इनको गुरू जी बड़े प्यारे लगे। इनके मन में गुरू जी की सेवा करने का चाव उठा। उनके लिए दूध और मक्खन लेकर बड़े प्रेम सहित सेवा में हाजिर हुए। गुरू जी ने पूछा – ‘बच्चा तुम्हारा नाम क्या है? तू क्या करता है?’ भूरा – ‘सच्चे पातशाह ! माता-पिता ने मेरा नाम भूरा रखा है। मैं भैंसों को चराने का काम करता हूं (गडरिया हूँ)।’ गुरू जी – ‘तू मन में क्या इच्छा करके हमारे पास आया है? तू क्या चाहता है?’ बच्चा – ‘जी, मेरी विनती है कि मुझे मौत के दु:ख से बचाओ, इस चौरासी के चक्र में से निकालो और मुक्ति प्रदान करो।’ गुरू जी – ‘बच्चा, तेरी तो अभी खेलने कूदने और खाने पाने की उम्र है। तुझे मौत और मुक्ति के विचारों ने कैसे आ जकड़ा? बड़ा होने पर ऐसी बातें करना।’ बच्चा – ‘महाराज जी मौत का क्या विश्वास है? क्या पता किस समय पर आ कर दबा ले। क्या पता बड़ा होऊँ कि न होऊँ।’ गुरू जी – ‘तुझे यह विचार कैसे आया?’ बच्चा – ‘महाराज जी, थोड़ा समय ही हुआ है, कुछ पठान हमारे गाँव के पास से गुजरे। वह जबरदस्ती हमारी फसलें काट कर ले गए, पक्की भी, कच्ची भी और अद्र्ध-पक्की भी। तब से मुझे पल-पल ख्याल आता रहता है कि जैसे पठान कच्ची, पक्की फसलें काट कर ले गए हैं, उसी तरह ही मौत भी बच्चे, नौजवान और बूढ़े को जब मन करे, आ दबायेगी। क्या पता मेरी बारी कब आ जाये? इसलिए मैं मौत से डरता हूँ। यह डर दूर करो सच्चे पातशाह !’ गुरू जी हँस पड़े और कहने लगे, ‘तू बच्चा नहीं। तूं तो बूढ़ा है। तूं बातें बुड्ढों वाली करता है। बलवान बनो! ईश्वर मौत की अपेक्षा कहीं बड़ा और बलवान है। अगर तू ईश्वर का हो जाये, तो मौत तुझे डरा न सकेगी, वह तुझसे डरने लग जायेगी, तुम जन्म मरन के चक्र से बच जाओगे। ईश्वर को हर समय पर याद रखा करो, उसका नाम जपा करो, उसके पैदा किये जीवों के साथ प्यार किया करो, उनकी प्रेम के साथ सेवा किया करो , तुम्हारे सभी डर और दु:ख दूर हो जाएंगे। तुझे मुक्ति मिल जायेगी।’ तब से ही बच्चे भूरा का नाम ‘बाबा बूढ़ा जी पड़ गया। आगे पढ़ेंगे कल की हाजरी में आज की इतनी सेवा परवान कीजिये, अगली हाजरी में (कल) पढ़ेंगे , इस साखी का अगला भाग।🙏 प्यार से कहिये *धंन श्री गुरू नानक देव जी* *धंन बाबा बुड्ढा जी* 🌸🌸🌸🌸🌸🌸 *🙏भूल चुक की क्षमा🙏*