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1 months ago
#🪴आयुर्वेद अपनाओ🤷रोग भगाओ🌱 . त्रिफला चूर्ण (Triphala Churna) त्रिफला तीन फलों—आंवला, हरड़ और बहेड़ा—का मिश्रण है। इसे आयुर्वेद में 'रसायन' माना गया है जो शरीर को पुनर्जीवित करता है। पाचन और कब्ज: यह एक हल्का रेचक (laxative) है जो पेट साफ करने में मदद करता है। डिटॉक्सिफिकेशन: शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालकर खून को साफ करता है। आंखों के लिए: यह आंखों की रोशनी बढ़ाने में भी सहायक माना जाता है। इम्यूनिटी और त्वचा: इसके एंटीऑक्सीडेंट गुण इम्यूनिटी बढ़ाते हैं और मुंहासों जैसी त्वचा की समस्याओं में राहत देते हैं। 2. इसबगोल (Isabgol/Psyllium Husk) इसबगोल एक प्राकृतिक फाइबर (dietary fiber) है जो 'प्लांटैगो ओवाटा' के बीजों की भूसी से प्राप्त होता है। कब्ज से राहत: यह आंतों में पानी सोखकर मल को नरम बनाता है, जिससे वह आसानी से बाहर निकल जाता है। कोलेस्ट्रॉल और वजन: नियमित सेवन से यह खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने और वजन नियंत्रण में मदद कर सकता है। दस्त (Diarrhea) में सहायक: दही के साथ लेने पर यह दस्त को रोकने में भी प्रभावी होता है। 3. हरड़ (Harad/Haritaki) हरड़ को 'औषधियों की जननी' कहा जाता है और यह त्रिफला का एक मुख्य हिस्सा है। भूख और मेटाबॉलिज्म: यह पाचन अग्नि को प्रज्वलित कर भूख बढ़ाती है और मेटाबॉलिज्म में सुधार करती है。 पेट के रोग: गैस, एसिडिटी और ब्लोटिंग जैसी समस्याओं में यह रामबाण औषधि है。 किडनी और लिवर: यह किडनी को डिटॉक्स करने और लिवर के कार्य में सुधार करने में मदद करती है। त्रिफला और इसबगोल का एक साथ उपयोग इन दोनों को मिलाकर लेने से पेट की गहरी सफाई होती है। सेवन प्रक्रिया: सभी जड़ी बूटियों को सुखा कर पीस कर चूर्ण बनाओ रात को सोने से पहले 1 चम्मच त्रिफला और 2 चम्मच इसबगोल गुनगुने पानी के साथ लेने की सलाह दी जाती है। ⚠️सावधानी: गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों को इनका सेवन डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए।