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#🕉होलिका दहन कथा मुहूर्त, पूजा विधी🔯 होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा को बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। 2026 में, होलिका दहन 3 मार्च को होगा, जिसमें रात 10:50 से 12:10 बजे के बीच का समय पूजा के लिए उत्तम है। मान्यता है कि भगवान विष्णु के भक्त प्रहलाद को अग्नि में न जलने का वरदान प्राप्त था, जबकि दुष्ट होलिका अग्नि में जल गई। YouTube YouTube +3 होलिका दहन 2026 मुहूर्त और पूजा विधि: तिथि और समय (2026): 3 मार्च 2026, रात्रि 10:50 से 12:10 (प्रदोष काल में भद्रा रहित समय)। पूजन सामग्री: गंगाजल, रोली, अक्षत (साबुत चावल), फूल, कच्चा सूत, हल्दी, मूंग, गेहूं की बालियां, गोबर के उपले, नारियल। पूजा विधि: स्थान शुद्धि: होलिका स्थल को गंगाजल से साफ करें। प्रतिमा स्थापना: होलिका और भक्त प्रहलाद की प्रतिमा स्थापित करें, भगवान नरसिंह की पूजा करें। सूजन/परिक्रमा: होलिका के चारों ओर कच्चे सूत से 3, 5 या 7 बार परिक्रमा करें। अर्पण: रोली, चावल, फूल, फल, अनाज और गेहूं की नई बालियां अर्पित करें। दहन: शुभ मुहूर्त में अग्नि जलाएं, भगवान की पूजा करें। भस्म का महत्व: दहन की राख (भस्म) को घर लाएं; यह नकारात्मक ऊर्जा दूर करती है। NDTV.in NDTV.in +6 होलिका दहन की पौराणिक कथा: भक्त प्रहलाद भगवान विष्णु के परम भक्त थे, लेकिन उनके पिता हिरण्यकशिपु उन्हें विष्णु भक्त मानने को तैयार नहीं थे। हिरण्यकशिपु ने अपनी बहन होलिका, जिसे अग्नि से न जलने का वरदान था, को प्रहलाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठने को कहा। इस प्रयास में, प्रहलाद भगवान विष्णु की कृपा से सुरक्षित बच गए, जबकि होलिका जल गई। यह कहानी अच्छाई की जीत और बुराई के अंत को दर्शाती है