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पवित्र यजुर्वेद अ. 40 मं. 8 में है कि
कविर् मनीषि स्वयम्भूः परिभृ व्यवधाता, भावार्थ है कि कबीर परमात्मा सर्वज्ञ है (मनीषि का अर्थ सर्वज्ञ होता है) तथा अपने आप प्रकट होता है। वह (परिभू) सनातन अर्थात् सर्वप्रथम वाला प्रभु है।
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