ramavtar
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#सत_भक्ति_सन्देश जो धन हरिके हेत, धर्म राह नहीं लगात। सो धन चोर लबार गह, धर छाती पर लात॥ जो धन परमात्मा के निमित खर्च नहीं होता, कभी धर्म कर्म में नहीं लगता, उसके धन को डाकू, चोर, लुटेरे छाती ऊपर लात धरकर यानि डरा-धमकाकर छीन ले जाते हैं। ##sant rampal ji maharaj