|| मेरे हनुमत... चाहे न रहो तुम मेरे साथ""||
|| पर अपने होने का अहसास रहने दो""||
|| न हो मेरे हाथो मे तुम्हारा हाथ"" पर मन मे एक आस् रहने दो""||
||माना मै सहम जाता हूँ अकेले मे"" सन्नाटे मे धड़कनों की आवाज रहने दो"" ||
||जो हवाए छु कर गुजरती तुमको"" उन हवाओ मे अपना वास् रहने दो"" ||
||न मिल सके तुम्हारा नजारा न सही"" पर मन मे तुम्हारा आवास रहने दो"" ||
||माना नदी के दो किनारे से है हम"" पर कभी तो बहेगा प्रेम का स्रोत कोई"" अपनी किस्मत पर ये विस्वास"" और अंतर्मन मे ये विस्वास रहने दो""||
प्रातः कालीन मुकेश शर्मा की तरफ से आप सब को जय राम जी की #📒 मेरी डायरी #☝ मेरे विचार