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Mukesh Sharma
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17 hours ago
सुप्रभात तद्विकार स्त्रुटेत्तच्च ह्यशक्यं लोह त्रोटनम्। मानवं निर्बलं चित्तं पराजेतुं च शक्नुयात्।। *भावार्थ :- लोहे को तोड़ना असंभव है, लेकिन उसकी बीमारी (जंग) ही लोहे को तोड़ डालती है। इस प्रकार एक व्यक्ति को हराया नहीं जा सकता है, लेकिन उसके कमजोर विचार, दोष व दुर्गुण ही उसकी हार का कारण बनते हैं।* #📒 मेरी डायरी #🙏सुविचार📿 #👫 हमारी ज़िन्दगी #☝अनमोल ज्ञान #☝ मेरे विचार
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