sn vyas
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#भक्ति ⁉️प्रथम श्रेणी की भक्ति क्या है?⁉️ आहारनिद्राभयमैथुनं च सामान्यमेतत् पशुभिर्नराणाम्। धर्मो हि तेषामधिको विशेषो धर्मेण हीनाः पशुभिः समानाः॥ ✍️भावार्थ:खाना, सोना, भय और मैथुन — ये गुण मनुष्य और पशु दोनों में समान हैं,परंतु धर्म का पालन केवल मनुष्य ही कर सकता है।धर्म से रहित मनुष्य पशु के समान कहा गया है। 🔸 उठते, बैठते, चलते, खाते और सोते समय भगवान के नाम का स्मरण करना चाहिए। हरिनाम जप में न देश का बंधन है और न ही समय का। उत्थाने शयने गमने च भुञ्जाने नामस्मरणं सततं विधेयम्। न देशकालौ नियमौ तु तत्र हरेर्नाम्नि प्रोक्तमिह शास्त्रसारम्॥ भावार्थ: उठते, सोते, चलते और भोजन करते समय भगवान के नाम का निरंतर स्मरण करना चाहिए। हरिनाम जप के लिए देश और काल का कोई नियम नहीं है। 🔸 यह संसार हमारा स्थायी घर नहीं है। हम सब यहाँ भगवान से अपने भूले हुए संबंध को पुनः जोड़ने आए हैं। नायं लोको वसतिः स्थिरा मे न गृहं न च नित्यनिवासभूमिः। भगवद्भ्रष्टं तु पुनः संबंधं संयोजयितुं खलु जीवयात्रा॥ भावार्थ: यह संसार हमारा स्थायी निवास नहीं है। जीव का इस संसार में आना भगवान से अपने टूटे हुए संबंध को फिर से जोड़ने के लिए है। 👉 जीवन का कोई भरोसा नहीं है। इसलिए मनुष्य को चाहिए कि वह भगवान की भक्ति में ही जीवन का आनंद ले। अनित्यं जीवनमल्पमेव क्षणे क्षणे नश्यति देहयोगः। तस्मात् भजस्व प्रभुमेकचित्तं भक्तिर्हि नित्यं परमार्थसारः॥ भावार्थ: यह जीवन क्षणभंगुर और अनित्य है। इसलिए एकाग्र चित्त से भगवान का भजन करना चाहिए, क्योंकि भक्ति ही जीवन का परम उद्देश्य है। 👉 इतना हरिनाम जप करो कि मृत्यु भी अपना लेखा छोड़ दे। एवं जपन्तं हरिनाममेकं मृत्युरपि स्वं लेखनं जहाति। भावार्थ: जो मनुष्य एकनिष्ठ होकर हरिनाम का जप करता है, उसके लिए मृत्यु भी अपना हिसाब त्याग देती है। 👉 न धन चाहिए, न वैभव, न संग्रह। केवल भगवान का प्रेम ही जीवन का लक्ष्य है। नार्थो न कामो न च संग्रहश्च प्रेमैव नित्यं भगवति वाञ्छ्यम्। भावार्थ: न धन, न भोग और न ही संग्रह की कामना करनी चाहिए। भगवान का प्रेम ही सच्ची साधना है। 👉 न कोई कुछ लेकर आया है और न कोई कुछ लेकर जाएगा। मनुष्य अकेला आता है और अकेला ही जाता है। न किञ्चिदानीतं न च किञ्चिद् नेतुम् जीवेन शक्यं भवबन्धमध्ये। एकाकिनः आगमनं गमनं च शास्त्रेषु नित्यं परिकीर्तितं हि॥ भावार्थ: इस संसार में जीव न कुछ लेकर आता है और न कुछ लेकर जाता है। आना और जाना दोनों ही अकेले होता है — यही शास्त्रों का नित्य सिद्धांत है। 🌸 महामंत्र हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे