लक्ष्मी नारायण
#जय लक्ष्मी नारायण
लक्ष्मी और नारायण की संयुक्त रूप से पूजा करना ब्रह्मांड की पालनकर्ता और ऐश्वर्य प्रदाता शक्तियों को एक साथ साधने जैसा है। इनकी कृपा से न केवल भौतिक बल्कि आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दोषों का भी निवारण होता है।
लक्ष्मी नारायण के आशीर्वाद से मुख्य रूप से निम्नलिखित दोष दूर होते हैं:
1. दरिद्रता और आर्थिक दोष
लक्ष्मी जी धन की देवी हैं और नारायण उसके संरक्षक। जब इनकी संयुक्त कृपा होती है, तो घर से 'अलक्ष्मी' (दरिद्रता) का वास समाप्त होता है। यदि कुंडली में 'धन योग' बाधित हो या आय के स्रोतों में निरंतर रुकावट आ रही हो, तो वह दोष दूर होता है और सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
2. पितृ दोष का प्रभाव कम होना
भगवान विष्णु को पितरों का अधिपति माना जाता है। लक्ष्मी नारायण की भक्ति करने से पितृ प्रसन्न होते हैं। यदि परिवार में वंश वृद्धि में बाधा आ रही हो या बिना कारण के कलह रहता हो, तो इनकी आराधना से पितृ दोष की शांति होती है और कुल की उन्नति होती है।
3. दांपत्य जीवन के दोष
लक्ष्मी नारायण को आदर्श युगल माना जाता है। इनकी पूजा से वैवाहिक जीवन के तनाव, मनमुटाव और मांगलिक दोष जैसे ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं। यह आशीर्वाद पति-पत्नी के बीच सामंजस्य और प्रेम को बढ़ाकर पारिवारिक कलह को समाप्त करता है।
4. वास्तु दोष का निवारण
जिस घर में नियमित रूप से लक्ष्मी नारायण की पूजा और 'विष्णु सहस्रनाम' का पाठ होता है, वहां की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती है। घर के उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) या मुख्य स्थान पर इनकी उपस्थिति से वास्तु जनित दोष स्वतः शांत होने लगते हैं और घर में सकारात्मकता का संचार होता है।
5. ग्रहों के अशुभ प्रभाव (विशेषकर शनि और राहु)
भगवान विष्णु 'जगन्नाथ' हैं, जो सभी ग्रहों को नियंत्रित करते हैं। लक्ष्मी नारायण की शरण में जाने से शनि की साढ़ेसाती या राहु-केतु के अशुभ गोचर से होने वाली मानसिक और शारीरिक परेशानियां दूर होती हैं। यह भक्त के भीतर संकल्प शक्ति पैदा करता है, जिससे वह बुरे समय के दोषों को पार कर लेता है।
> विशेष: "ॐ लक्ष्मी नारायणाय नमः" मंत्र का नियमित जाप 'भय' और 'असुरक्षा' जैसे मानसिक दोषों को दूर कर व्यक्ति को निर्भय और संतुष्ट बनाता है।
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